अमेरिका संग ट्रेड डील पर आर-पार के मूड में कांग्रेस, राहुल गांधी के बाद सलमान खुर्शीद आए सामने, मांगा सबूत
भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर एक बार फिर कांग्रेस पार्टी की तरफ से सवाल उठाए गए हैं. कांग्रेस नेता खुर्शीद ने कहा है कि यह कह देना बहुत आसान है. कोई झूठ बोल रहा है. गलत कह रहा है. बात बहुत साफ है कि क्या ट्रेड डील हुई है. वो बता दें.
खुर्शीद ने कहा है कि अभी तक इसमें कोई साइन नहीं हुए हैं. कांग्रेस पार्टी के पास या किसी भी एक्सपर्ट्स के पास जो खबर पहुंच रही है, उसमें यही बताया जा रहा है कि ट्रेड डील में वो बातें नहीं है, जो सरकार की ओर से कही जा रही हैं. अगर सरकार अगर इसे ठीक नहीं मानती है, तो दस्तावेज सामने रख दें. इसमें क्या समस्या है?
ट्रेड डील के दस्तावेज सामने रख दें सरकार: सलमान खुर्शीद
कांग्रेस सांसद ने कहा है कि सरकार सबूत दे कि क्या ट्रेड डील हुई है. यह तो अंतरिम ट्रेड डील है. हस्ताक्षर नहीं है. यह मार्च के आखिर में होंगे. सलमान खुर्शीद ने आगे कहा कि अभी तक जो बातें सामने आईं है, वह कहां से आई हैं. देर रात व्हाइट हाउस से ट्वीट आता है. उसी से हम अंदाजा लगाते हैं.
#WATCH | Delhi | On India-US trade agreement, Congress leader Salman Khurshid says, “They should present evidence about the trade deal happening… While it is still called an interim trade deal, where are we listening to it all from? What is being said is, based on whatever… pic.twitter.com/Q2oRqxOGrL
— ANI (@ANI) February 14, 2026
सलमान खुर्शीद ने मांग करते हुए कहा है कि सरकार मानती है कि ट्रेड डील को लेकर जो बातें हो रही हैं, वो सही नहीं है, तो ट्रेड डील के जो दस्तावेज हैं, वो सामने रख दें. इसमें क्या समस्या है. हमें जो भी पता चल रहा है, उसके मुताबिक जो भी ट्रेड डील को लेकर चल रही हैं, वह असलियत नहीं है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने क्या कहा था?
कांग्रेस ने मजदूर संगठनों की हड़ताल का हवाला देते हुए आरोप लगाए थे कि मजदूरों और किसानों के भविष्य को नजरंदाज किया गया है. पार्टी के नेता राहुल गांधी ने सवाल किया था कि पीएम मोदी मजदूरों और किसानों की सुनेंगे या किसी ग्रिप की पकड़ में जकड़े हुए हैं.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं. वह सड़कों पर उतर गए हैं. उन्हें डर है कि लेबर कानून के चार प्रावधान उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगे. किसानों में भी इसको लेकर डर है.