क्या पति की मर्जी के बगैर खुला से शादी खत्म कर सकती है मुस्लिम महिला? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने इस्लाम में महिलाओं के खुला के अधिकार से जुड़े एक मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. केरल हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि मुस्लिम महिला पति की सहमति के बगैर शादी खत्म कर सकती है या खुला ले सकती है. इस्लाम में उसको ये अधिकार दिया गया है. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. कोर्ट ने इसे पर्सनल लॉ से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सीनियर एडवोकेट शोएब आलम को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने मामला 22 अप्रैल के लिए लिस्ट कर दिया है. यह मामला केरल हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया कि इस्लामिक लॉ मुस्लिम महिला को खुला के जरिए शादी खत्म करने का अधिकार देता है, उसकी इच्छा उसके पति की इच्छा पर निर्भर नहीं है.
इस आदेश को लेकर केरल हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल हुई थी, जिसे जस्टिस एस मोहम्मद मुस्ताक और जस्टिस एससी दियास की बेंच ने खारिज कर दिया था. यह याचिका मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के तहत एक मुस्लिम महिला के शादी को खत्म करने के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थी.
पुनर्विचार याचिका में कहा गया था कि अगर मुस्लिम महिला शादी करना चाहती है तो उसे पति से तलाक के लिए कहना चाहिए, अगर वह मना करता है तो काजी या कोर्ट के पास जाए. हालांकि, कोर्ट ने इस बात को खारिज कर दिया. कोर्ट ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि मुस्लिम महिला को खुला लेने का पूर्ण अधिकार नहीं है.
कोर्ट ने आदेश में कहा था कि पत्नी की ओर से शादी खत्म करने का अधिकार पवित्र कुरान में महिलाओं को दिया गया है, जो पति की सहमति या उसकी इच्छा पर निर्भर नहीं करता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि खुला के जरिए शादी खत्म करने को वैसी ही मान्यता प्राप्त है, जिस तरह पति को तलाक के लिए है.
कोर्ट ने कहा था कि खुला तभी वैलिड है, जब पत्नी शादी खत्म करना चाहती है और वह मेहर न ले और शादी के दौरान मिली अन्य चीजों को लौटाने की पेशकश करे और शादी को चलाने के प्रयास किए गए हों.