तेलंगाना में राजनीतिक गहमागहमी, टिकटों के बंटवारे और वफादारों के तिरस्कार से BJP-कांग्रेस में मचा घमासान
तेलंगाना के जगित्याल में नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है, जहां टिकट वितरण में कथित पक्षपात और पैसे के खेल ने दोनों प्रमुख पार्टियों- भाजपा और कांग्रेस के अंदर ही विद्रोह की ज्वाला भड़का दी है. वफादार कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और 5 लाख रुपये में टिकट बेचने के गंभीर आरोपों ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अरविंद को धमकी देने से लेकर कांग्रेस में पूर्व मंत्री जीवन रेड्डी के समर्थकों के आंसू तक, जगित्याल की सियासत आज गद्दारी और वफादारी की जंग में बदल चुकी है.
भाजपा नेता पर पांच लाख में टिकट बेचने का आरोप
जगित्याल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थिति बदतर है, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसद अरविंद और जिला प्रभारी बोगा श्रावणी पर जमकर गुस्सा निकाला है. एक भावुक कार्यकर्ता ने कहा कि उनका परिवार 40 साल से पार्टी के लिए नक्सलियों की गोलियों का सामना करता आ रहा है, लेकिन पार्टी ने उन्हें तरजीह नहीं दी.
आरोप है कि टिकटें पांच लाख रुपये में बिकी हैं और उन्हें ऐसे लोगों को दी गई हैं जो पार्टी का दुपट्टा भी नहीं ओढ़ते हैं. नाराज नेताओं ने सांसद अरविंद को ‘ताड़ो-पेड़ो’ का निपटारा करने की चेतावनी देते हुए कहा है कि जिले में आने वाले नेताओं की धुनाई की जाएगी और अरविंद की हार जगित्याल से ही शुरू होगी.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री के आवास पर किया विरोध प्रदर्शन
वहीं, कांग्रेस में भी स्थिति शांत नहीं है. टिकट वितरण में पक्षपात के चलते मेटपल्ली नगर की महिला अध्यक्ष हरिता सहित कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है. हरिता ने कहा कि उन्हें 24वें वार्ड का टिकट मिलने का वादा किया गया था, लेकिन हाल ही में पार्टी में शामिल हुए गणेश को यह टिकट दे दिया गया, जिससे उन्हें गहरा दुख हुआ. इसके अलावा, पार्टी की ओर से BJP से कांग्रेस में आए विधायक संजय को तवज्जो देने को लेकर वरिष्ठ नेता जीवन रेड्डी के समर्थक आक्रोशित हैं. 50 सीटों में से 30 सीटें संजय के गुट को और महज 20 सीटें जीवन रेड्डी को दिए जाने पर कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री के आवास पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया.
तेलंगाना की राजनीति में चल रहा परिवर्तन और पैसे का खेल
यह पूरा मामला तेलंगाना की राजनीति में चल रहे परिवर्तन और पैसे के खेल को दर्शाता है. नगर निगम चुनाव आधार स्तर पर पकड़ मजबूत करने का मौका होता हैं, लेकिन जगित्याल में पार्टी आलाकमान की लापरवाही ने बड़े नुकसान की आशंका पैदा कर दी है. वफादारों को ठुकराकर परिवर्तित नेताओं को सम्मान देना पार्टियों के लिए महंगा पड़ सकता है.
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