‘सरकार यूएस सुप्रीम कोर्ट फैसले का अध्ययन…’, ट्रंप के टैरिफ फैसले पर रोक के बाद आया भारत का पहला रिएक्शन, क्या बोले मंत्री पीयूष गोयल
भारत सरकार ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए शुक्रवार को टैरिफ से जुड़े फैसले को लेकर बयान जारी किया है. इसमें कहा गया है कि भारत यूएस सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के डेवलपमेंट और इसके असर पर बारीकी से स्टडी कर रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को वहां की सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया, जिसमें उन्होंने दुनिया के देशों पर भारी टैरिफ लगा हुए हैं.
इस पूरे मामले पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हमने कल टैरिफ पर यूएस के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ध्यान दिया. वहां के राष्ट्रपति ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी इस मुद्दे पर की है. साथ ही वहां के प्रशासन ने कुछ फैसले भी लिए हैं. हम इस पर बाराकी से स्टडी कर रहे हैं.
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने क्या कहा?
अमेरिकी कोर्ट के फैसले पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि हाल ही में भारत सरकार टैरिफ को लेकर अदालत के फैसले की स्टडी करेगी. इस मामले को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस जयशंकर देख रहे हैं.
पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैंने मीडिया में पढ़ा कि अमेरिका की शीर्ष अदालत ने इस मामले में एक आदेश जारी किया है. उसे भारत सरकार अध्ययन करेगी. किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना पड़ी तो दी जाएगी. इस मामले को वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय देख रहे हैं. इस पर उन्होंने किसी भी तरह टिप्पणी करने से मना कर दिया है.
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है. इस फैसले के पक्ष में छह, जबकि विरोध में तीन जज थे. इसमें कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 में बने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया है, साथ ही भारी इम्पोर्ट टैरिफ लगाकर अपनी शक्तियों को गलत उपयोग किया है.
इस फैसले को अमेरिका के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने जस्टिस नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट और तीन लिबरल जजों के साथ मिलकर फैसला सुनाया है. इसमें कहा गया है कि IEEPA राष्ट्रपति के टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता है. यह पॉवर संवैधानिक रूप से कांग्रेस को दी गई है.
ट्रंप ने की US सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना
वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से की गई है. उन्होंने कहा है कि यह एक बहुत बुरा फैसला है. इसके अलावा ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के सहत 10 परसेंट ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. यह 150 दिनों तक के लिए टेम्पररी इम्पोर्ट सरचार्ज की इजाजत देता है.