हैदराबाद क्रिमिनल कोर्ट में हड़कंप, दो महीनों में पांचवीं बार बम की धमकी


हैदराबाद के नामपल्ली स्थित क्रिमिनल कोर्ट परिसर में आज एक बार फिर बम विस्फोट की धमकी ने हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद बम निरोधक दस्ते (बॉम्ब स्क्वाड) और पुलिस बल ने NIA (NIA) कोर्ट समेत पूरे परिसर की जांच शुरू कर दी है. यह घटना इस महीने की दूसरी और पिछले दो महीनों में पांचवीं बार है, जिससे अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और वकीलों समेत आम लोगों में दहशत का माहौल है.

पुलिस अलर्ट, घंटों चली जांच
सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन ने तत्काल अलर्ट कर दिया और अदालत परिसर के हर कोने की नाकाबंदी की गई. मौके पर मौजूद सूत्रों के अनुसार, बम स्क्वाड ने NIA कोर्ट के अलावा अन्य कोर्ट कक्षों और सार्वजनिक जगहों पर घंटों तक जांच की, हालांकि अभी तक किसी संदिग्ध वस्तु की पुष्टि नहीं हुई है. यह खबर आते ही अदालत परिसर में काम करने वाले वकीलों, कर्मचारियों और मुकदमों के सिलसिले में आए लोगों में खलबली मच गई. लगातार हो रही इन घटनाओं ने न केवल अदालत की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया है, बल्कि यहां काम करने वालों के मन में सुरक्षा को लेकर डर पैदा कर दिया है.

लगातार मिल रहीं धमकियां, सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती
यह मामला सिर्फ एक आम धमकी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लगातार बढ़ती प्रवृत्ति दिख रही है. पिछले दो महीनों में यह पांचवीं बार है जब नामपल्ली कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. NIA कोर्ट जहां संवेदनशील मामलों की सुनवाई होती है, वहां बार-बार ऐसी घटनाएं होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन गया है. पिछले सभी मामलों में धमकियां झूठी साबित हुई थीं, लेकिन पुलिस को हर बार सतर्क रहना पड़ता है. अधिकारियों का मानना है कि यह कोई शरारती तत्व या मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति की करतूत हो सकती है, लेकिन किसी भी जोखिम को लेकर अनदेखी नहीं की जा सकती.

सुरक्षा बढ़ाने की मांग
मौजूदा हालात को देखते हुए अदालत के वकील संघ और अन्य अधिकारियों ने सिटी पुलिस कमिश्नर से अपील की है कि वे स्वयं मौके पर आकर सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करें. उनकी मांग है कि कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच हो और सीसीटीवी निगरानी को और अधिक मजबूत किया जाए. अभी पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपियों को पकड़ने में जुटी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और न्याय प्रणाली की गरिमा बनी रहे.



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