‘सबको मिले गर्भगृह में जाने का अधिकार’, उज्जैन महाकाल में VIP एंट्री पर आपत्ति जताने वाले से CJI ने क्यों कहा- तो आप भी कोई श्रद्धालू नहीं


उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी लोगों को प्रवेश की अनुमति के मामले पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि महाकाल के परिसर में कोई वीआईपी नहीं है, लेकिन इस तरह की याचिका दाखिल करना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता का मकसद भी श्रद्धा नहीं लगता है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि मंदिर में किसे प्रवेश मिले, यह तय करना कोर्ट का काम नहीं है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मंदिर प्रशासन को ज्ञापन देने की सलाह दी, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ली.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया कि उज्जैन के महाकेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश की अनुमति देना मंदिर प्रशासन और जिला अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करता है. याचिकाकर्ता दर्पण सिंह अवस्थी के वकील विष्णु शंकर जैन कहा कि वह यहां संविधान के अनुच्छेद 14 के उल्लंघन की बात कर रहे हैं. किसी व्यक्ति को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जाए या नहीं, ये दिशा-निर्देशों पर निर्भर होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट नागरिकों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता हैं. वह वीआईपी के आधार पर इस तरह भेदभाव नहीं कर सकता. एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में प्रवेश के लिए सभी के लिए एक जैसी नीति होनी चाहिए. विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गर्भगृह में प्रवेश करता है तो उसे कलेक्टर की सिफारिश पर अनुमति दी जाती है. इस तरह तो अगर कोई और श्रद्धालू महाकाल जाता है, तो उसको भी गर्भगृह में जाने और भगवान पर जल चढ़ाने का अधिकार है.

एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उनका कहना सिर्फ इतना है कि या तो गर्भगृह में जाने का अधिकार सबको मिले या किसी को भी नहीं. सबके लिए नियम एक जैसा हो. सीजेआई सूर्यकांत ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि गर्भगृह में जाने की अनुमति दी जाए या नहीं, इसका फैसला करना कोर्ट का काम नहीं है. कौन गर्भगृह में जाएगा और कौन नहीं, अगर ये फैसला कोर्ट करने लगा तो ये उसके लिए बहुत ज्यादा हो जाएगा. सीजेआई ने कहा कि अगर कोर्ट यह मानता है कि गर्भगृह में आर्टिकल 14 लागू होना चाहिए, तो कल को लोग आर्टिकल 19 जैसे दूसरे अधिकारों का भी दावा करने लगेंगे.

सीजेआई ने कहा, ‘पहले आप कहेंगे कि मेरे पास भी गर्भगृह में जाने का अधिकार है क्योंकि फलां व्यक्ति ने प्रवेश किया, फिर आप कहेंगे कि मुझे वहां मंत्र जाप करने का अधिकार है क्योंकि मेरे पास बोलने की आजादी है, तो इस तरह गर्भगृह के अंदर सभी मौलिक अधिकारों का दावा किया जाने लगेगा. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ये जो लोग याचिका दाखिल कर रहे हैं, ये भी श्रद्धालू नहीं हैं. ये कुछ और चाहते हैं. 



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