बजट से पहले राष्ट्रपति का ‘दही-चीनी’ शगुन क्या है इसका रहस्य? जानें आर्थिक भविष्य पर असर!


1 फरवरी 2026 मात्र एक प्रशासनिक तारीख नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक कुंडली के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. जिस तरह जन्म कुंडली में ग्रहों की चाल जीवन की दिशा तय करती है, उसी तरह केंद्रीय बजट देश की आर्थिक दशा-दिशा को तय करता है. ज्योतिष के मुताबिक, कोई भी बड़ा फैसला शुभ मुहूर्त और पॉजिटिव एनर्जी के बगैर अधूरा माना जाता है. इसलिए बजट जैसे राष्ट्रीय कर्मकांड से पहले शगुन की परंपरा अदा की जाती है.

1 फरवरी 2026 मात्र एक प्रशासनिक तारीख नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक कुंडली के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. जिस तरह जन्म कुंडली में ग्रहों की चाल जीवन की दिशा तय करती है, उसी तरह केंद्रीय बजट देश की आर्थिक दशा-दिशा को तय करता है. ज्योतिष के मुताबिक, कोई भी बड़ा फैसला शुभ मुहूर्त और पॉजिटिव एनर्जी के बगैर अधूरा माना जाता है. इसलिए बजट जैसे राष्ट्रीय कर्मकांड से पहले शगुन की परंपरा अदा की जाती है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट पेश करने से पहले आज दही-चीनी खिलाने की परंपरा निभाई. ज्योतिष शास्त्र में दही को चंद्र तत्व से जोड़ा जाता है, जो मन, स्थिरता और भावनात्मक संतुलन के लिए जरूरी है. जबकि चीनी का संबंध शुक्र ग्रह से होता है, जो सुख, समृद्धि और भौतिक वैभव प्रदान करता है. दोनों का मिलन यह बताता है कि, बजट में कठोर आर्थिक फैसलों के साथ संतुलन और जनकल्याण बना रहे.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट पेश करने से पहले आज दही-चीनी खिलाने की परंपरा निभाई. ज्योतिष शास्त्र में दही को चंद्र तत्व से जोड़ा जाता है, जो मन, स्थिरता और भावनात्मक संतुलन के लिए जरूरी है. जबकि चीनी का संबंध शुक्र ग्रह से होता है, जो सुख, समृद्धि और भौतिक वैभव प्रदान करता है. दोनों का मिलन यह बताता है कि, बजट में कठोर आर्थिक फैसलों के साथ संतुलन और जनकल्याण बना रहे.

Published at : 01 Feb 2026 11:07 AM (IST)

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