Anurag Thakur BCCI Ban Controversy; CJI Surya Kant Verdict Update


  • Hindi News
  • Sports
  • Cricket
  • Anurag Thakur BCCI Ban Controversy; CJI Surya Kant Verdict Update | 2017 Lodha Committee Decision

नई दिल्ली51 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
अनुराग ठाकुर 2016 में BCCI के प्रेसिडेंट बने थे। उन्हें 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया था। - Dainik Bhaskar

अनुराग ठाकुर 2016 में BCCI के प्रेसिडेंट बने थे। उन्हें 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के पूर्व प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर से लाइफ टाइम बैन हटा दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को अपने 9 साल पुराने फैसले को बदला है। उसमें ठाकुर को बोर्ड से दूर रहने को कहा गया था। अब वे भारतीय क्रिकेट के संचालन में बोर्ड के कामकाज में शामिल हो सकेंगे।

कोर्ट ने कहा कि उन पर जिंदगी भर का प्रतिबंध लगाना न तो सही था और न ही इसका कोई इरादा था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा- ‘यह आनुपातिकता के सिद्धांत को लागू करने का सही मामला है।’ बेंच ने यह भी साफ कर दिया कि अनुराग ठाकुर पहले ही बिना शर्त माफी मांग चुके हैं, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।

साल 2017 में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू न करने की वजह से अनुराग ठाकुर को पद से हटाया गया था। लोढ़ा कमेटी के नियमों में आयु सीमा और सरकारी पद जैसे कई कड़े प्रावधान शामिल थे।

2017 में लगा था अनुराग ठाकुर पर बैन सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2 जनवरी, 2017 के फैसले के निर्देश 3 और 4 पहले ही वापस ले लिए गए थे। मौजूदा आवेदन केवल उन पर लगाए गए प्रतिबंध से संबंधित था। अनुराग ठाकुर के वकील ने कहा कि यह प्रतिबंध लगभग 9 साल से लागू था और इसे जारी रखने से गंभीर कठिनाई होगी।

कोर्ट की अवमानना के कारण लगा था बैन 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को नोटिस जारी कर उनसे पूछा था कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने उनसे लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने से बचने के लिए ICC से एक लेटर के जरिए दखल मांगने के संबंध में उन पर लगाए गए झूठी गवाही के आरोपों पर जवाब देने को कहा था।

———————————

सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए…

सुप्रीम कोर्ट बोला-जिन्हें बैट पकड़ना नहीं आता,वे क्रिकेट संघों में

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट और अन्य खेल संघों के संचालन पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि खेल संस्थाओं का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए, जो खेल को समझते हों। क्रिकेट संघों में रिटायर्ड क्रिकेटरों को जगह मिलनी चाहिए, न कि ऐसे लोगों को जो बैट तक पकड़ना नहीं जानते। पढ़ें पूरी खबर



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *