वाराणसी में गंगा में प्रदूषण की सफाई को लेकर योगी सरकार को लगी फटकार, NGT ने जताई नाराजगी


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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सोमवार (9 फरवरी, 2026) को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों में अनुपचारित (Untreated) सीवेज और कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी के बहाव पर कड़ी नाराजगी जताई है. एनजीटी ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार समेत सभी संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

वाराणसी और चंदौली के कुल 76 में से 31 नाले नहीं किए गए टैप

एनजीटी ने स्टॉर्म वाटर ड्रेनों और गंगा की सहायक नदी अस्सी की अवैध टैपिंग को पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन बताया है. ट्रिब्यूनल की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य कार्य योजना में सामने आया कि वाराणसी और चंदौली जिलों में कुल 76 नाले गंगा और वरुणा नदियों में गिरते हैं. इनमें से 31 नाले अभी तक पूरी तरह टैप नहीं किए गए हैं, जिससे बड़ी मात्रा में अनुपचारित सीवेज सीधे नदियों में पहुंच रहा है.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यह भी पाया कि वाराणसी में गंगा की सहायक नदी अस्सी को नाला मानकर टैप किया गया है, जो गंगा नदी (पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 का सीधे तौर पर उल्लंघन है.

वाराणसी में सीवर कनेक्टिविटी की रफ्तार धीमी, NGT ने जताई चिंता

इस दौरान एनजीटी ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के सीवर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति पर भी चिंता जाहिर की है. उल्लेखनीय है कि यूपी के मात्र वाराणसी जिले में 4.14 लाख घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने का अभियान योगी सरकार की तरफ से चलाया गया है, लेकिन अब तक 4.14 लाख घरों में से मात्र 1.56 लाख घरों को ही सीवर नेटवर्क से जोड़ा गया है. एनजीटी ने राज्य सरकार को 100 प्रतिशत सीवर कनेक्टिविटी के लिए स्पष्ट समय सीमा देने के निर्देश दिए हैं.

इसके अलावा, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कहा है कि इस मामले में अगली अहम सुनवाई 21 अप्रैल, 2026 को होगी.



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