दिल्ली में कृषि भवन से हटाई जाएगी 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद? नए टेंडर से मस्जिद पर छाए संकट के बादल
दिल्ली के कृषि भवन परिसर को सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत कायाकल्प किया जाना है, लेकिन इसी भवन में स्थित करीब 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद के अस्तित्व को लेकर सवाल खड़ा हो गया है.
CPWD ने पिछले महीने कृषि भवन और शास्त्री भवन के रीडेवलपमेंट के लिए एक टेंडर जारी किया था. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेंडर के साथ विस्तृत नक्शों में मौजूदा भवनों को डिमोलिश करने के बाद नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स 4 और 5 बनाने का प्रावधान है. नए प्लान में कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को शामिल नहीं किया गया है.
ऐसे में कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्निर्माण के लिए जारी नए टेंडर के बाद ये आशंका जताई जा रही है कि इस ऐतिहासिक मस्जिद को हटाया जा सकता है. इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड ने पहले भी चिंता जाहिर कर चुकी है.
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के जरिए बन रहीं नई इमारतें
केंद्र सरकार की सेंट्रल विस्टा और कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट परियोजना के तहत केंद्र सरकार के कई पुराने सरकारी भवनों को तोड़कर नई इमारतें बनाई जा रही हैं. इसी योजना के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन का पुनर्निर्माण भी किया जाना है. इसके लिए CPWD की ओर से टेंडर भी जारी किए जा रहे हैं.
वक्फ बोर्ड ने अपने बयान में क्या कहा है?
वक्फ बोर्ड का कहना है कि इस टेंडर से जुड़े नए नक्शों में कदीमी मस्जिद को साफ तौर पर नहीं दिखाया गया है, जिससे उसके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं. बोर्ड के मुताबिक, ये मस्जिद 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और मस्जिद कृषि भवन से भी पहले की है और यहां काफी पहले से नियमित रूप से नमाज भी होती आई है. इस मस्जिद में मुस्लिम कर्मचारी और अधिकारी भी नियमित रूप से नमाज पढ़ते हैं. इस मस्जिद के बेसमेंट में औरतों के लिए भी नमाज अदा करने की जगह है.
अदालत जा चुका है वक्फ बोर्ड
वक्फ बोर्ड का कहना है कि साल 2021 में भी इस मस्जिद की सुरक्षा को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था. हालांकि उस समय सरकार की ओर से ये भरोसा दिलाया गया था कि पुनर्विकास के दौरान मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. हालांकि इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज भी कर दी थी, लेकिन साथ ही ये भी कहा था कि अगर भविष्य में मस्जिद को कोई खतरा होता है तो वक्फ बोर्ड दोबारा अदालत जा सकता है.
अब इस कदीमी मस्जिद के इमाम इसके हटाए जाने की आशंका से परेशान हैं. उनका कहना है कि ये सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़ी हुई जगह है. फिलहाल सरकार की ओर से मस्जिद को हटाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.