लखनऊ की फेमस बास्केट चाट खाई क्या आपने, जानें 43 साल पुरानी इस मशहूर चाट का इतिहास


भारत अपने स्वादिष्ट खाने के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. हर शहर की अपनी एक खास पहचान है. कहीं हैदराबाद की दमदार बिरयानी मशहूर है, तो कहीं दिल्ली के छोले-भटूरे लोगों को दीवाना बना देते हैं. लेकिन जब चाट की बात आती है, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow का नाम अपने आप ज़ुबान पर आ जाता है. लखनऊ सिर्फ नवाबों और तहजीब का शहर ही नहीं, बल्कि लाजवाब स्वादों का भी शहर है.

यहां की गलियों में घूमते हुए आपको तरह-तरह की चाट, कबाब और मिठाइयों की खुशबू महसूस होगी. इन्हीं स्वादों के बीच एक ऐसी खास डिश है, जिसने पिछले चार दशकों से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई हुई है. ये डिश बास्केट चाट है.  शायद आपको भी इस बारे में पता न हो लेकिन लखनऊ की बास्केट चाट का इतिहास करीब 43 साल पुराना है. तो आइए जानते हैं कि 43 साल पुरानी इस मशहूर चाट का इतिहास क्या है. 

43 साल पुरानी इस मशहूर चाट का इतिहास क्या है

लखनऊ के मशहूर इलाके हजरतगंज में स्थित Royal Cafe है. यही वह जगह है जहां करीब 43 साल पहले बास्केट चाट की शुरुआत हुई थी. इस रेस्टोरेंट की स्थापना सन् 1991 में तीन भाइयों  Murli Dhar Ahuja, Lakhan Lal Ahuja और Kanhaiya Lal Ahuja  ने की थी. छोटे से रेस्टोरेंट से शुरू हुआ यह सफर आज लखनऊ में कई आउटलेट्स तक पहुंच चुका है. हजरतगंज मेट्रो स्टेशन के ठीक सामने होने की वजह से यह जगह लोगों के लिए पहचान का केंद्र बन चुकी है. अक्सर लोग रास्ता बताते समय भी रॉयल कैफे का नाम लेते हैं. 

बास्केट चाट आखिर है क्या?

बास्केट चाट आम चाट से बिल्कुल अलग होती है. इसे बनाने का तरीका ही इसे खास बनाता है.  सबसे पहले कद्दूकस किए हुए आलू को तलकर एक छोटी टोकरी यानी बास्केट का आकार दिया जाता है. यह टोकरी इतनी कुरकुरी होती है कि इसे खाने में मजा आ जाता है. इसके बाद इस आलू की टोकरी में अलग-अलग चीजें भरी जाती हैं, जैसे मसालेदार छोले, दही बड़ा, आलू टिक्की, पापड़ी, मीठी और तीखी चटनी, सेव और मुरमुरे, कुटी हुई धनिया और मिर्च, चाट मसाला, जीरा और अमचूर, ताजे अनार के दाने इन सबका स्वाद मिलकर ऐसा जबरदस्त कॉम्बिनेशन बनाता है कि हर बाइट में अलग स्वाद महसूस होता है. 

इसका स्वाद क्यों है इतना खास?

बास्केट चाट में गरम और ठंडी चीजों का अनोखा मेल होता है. गरम टिक्की और छोले के साथ ठंडा दही, ऊपर से मीठी-खट्टी चटनियां, यह सब मिलकर स्वाद का ऐसा अनुभव देते हैं जो लंबे समय तक याद रहता है. ऊपर से डाले गए अनार के दाने इसे देखने में भी खूबसूरत बना देते हैं.  सबसे दिलचस्प बात यह है कि चाट खाने के बाद थोड़ा सा हाजमा पेस्ट भी दिया जाता है, जो पाचन में मदद करता है. यही छोटी-छोटी बातें इस डिश को खास बनाती हैं. 

कीमत और समय

इस मशहूर बास्केट चाट की कीमत लगभग 200 के आसपास है. इसे बनाने में करीब 10 मिनट का समय लगता है, लेकिन इसका स्वाद आपको लंबे समय तक याद रहता है. अगर आप लखनऊ जा रहे हैं तो हजरतगंज और अमीनाबाद में आपको बास्केट चाट आसानी से मिल जाएगी. खासतौर पर Royal Cafe की बास्केट चाट सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. 

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