Skanda Sashti 2026: संतान प्राप्ति का व्रत संकद षष्ठी आज, ऐसे करें पूजा और इन नियमों का करें पालन
Skanda Sashti 2026: स्कंद षष्ठी का व्रत फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रखा जाएगा. यह दिन विशेषरूप से माता गौरी और शंकर के पुत्र कार्तिकेय की पूजा के लिए होता है. इन्हें हम भगवान स्कंद, मुरुगन और सुब्रह्मणयम भी कहते हैं. आज रविवार, 22 फरवरी 2026 को माताओं ने स्कंद षष्ठी का व्रत रखा है.
हिंदू धर्म में संतान सुख की कामना और संतान के खुशहाल जीवन के लिए कई व्रत रखें जाते हैं, जिसमें स्कंद षष्ठी भी एक है. स्कंद षष्ठी का व्रत हम महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है. मान्यता है कि संतान कामना की इच्छा रखने वाले दंपत्ती या संतान के खुशहाल जीवन के लिए माताएं यदि श्रद्धापूर्वक इस व्रत करती हैं तो उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
स्कंद षष्ठी पूजा तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आज 22 फरवरी को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी. सुबह 11:09 से षष्ठी तिथि की शुरुआत हो जाएगी और 23 फरवरी को सुबह 09:09 तक रहेगी. 22 फरवरी को ही व्रत-पूजन किया जाएगा. पूजा के लिए इस दिन कई शुभ मुहूर्त रहेंगे, जोकि इस प्रकार हैं-
- पूजा शुभ मुहूर्त- 05 बजकर 12 मिनट से 06 बजकर 03 मिनट
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 39 मिनट
स्कंद षष्ठी पूजा नियम
सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें और फिर साफ कपड़े पहनें. सूर्य को जल अर्पित करें और फिर पूजाघर में पूजा की तैयारी करें. एक चौकी स्थापित कर भगवान कार्तिकेय की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें. सबसे पहले भगवान को गंगाजल से स्नान करें. चंदन का तिलक लगाएं और पीले फिर फूल, फल, भोग, धूप,पूजा सामग्री अर्पित करें. फिर स्कंद भगवान के मंत्रों का जाप करें और फिर आरती करें.
स्कंद षष्ठी व्रत के नियम
स्कंद षष्ठी व्रत के दौरान नियमों का पालन करना जरूरी होता है. इस दिन व्रत में सात्विक भोजन करें. फल, दूध, मेवे आदि का सेवन करें. लेकिन अनाज और तामसिक चीजों से परहेज करें. व्रत के दौरान किसी की बुराई और निंदा नहीं करें. पूरे दिन व्रत रखने के बाद अगले दिन नियमपूर्वक पारण करें.
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