‘सत्यमेव जयते…’ दिल्ली शराब घोटाले में केजरीवाल, कविता और सिसोदिया बरी, अदालत ने कहा—साजिश के ठोस सबूत नहीं
दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली आबकारी नीति मामले में तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष और पूर्व सांसद के. कविता, पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया. विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि जांच के दौरान कथित केंद्रीय साजिश की भूमिका साबित नहीं हो सकी और आरोप तय करने लायक पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आए. 12 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखने के बाद अदालत ने यह आदेश सुनाया. फैसले के तुरंत बाद हैदरृद में मीडिया से बात करते हुए कविता ने कहा कि उनकी न्यायपालिका पर आस्था कायम रही और सच की जीत हुई.
हैदराबाद में अपने निवास के बाहर समर्थकों के बीच पहुंचीं कविता भावुक दिखीं. उन्होंने कहा, ‘मैंने शुरू से कहा था कि मैं धुली हुई मोती की तरह बाहर आऊंगी, और आज वही हुआ. यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित था. मेरे परिवार ने कई महीनों तक मुश्किल समय झेला.’
उन्होंने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और कहा कि अब वे और ज्यादा ऊर्जा के साथ जनता की सेवा करेंगी. फैसले के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा.
स्वतंत्र भारत के इतिहास की ‘सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश: केजरीवाल
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास की ‘सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश’ बताया. मनीष सिसोदिया ने भी अदालत के फैसले को न्याय की जीत करार दिया. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं और लाभ पहुंचाने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया था. आरोप था कि नीति में बदलाव कर कुछ कारोबारी समूहों को फायदा पहुंचाया गया और बदले में रिश्वत ली गई. इसी क्रम में कई गिरफ्तारियां हुईं और देशभर में राजनीतिक बहस तेज हुई.
के. कविता पर क्या थे आरोप?
के. कविता का नाम कथित तौर पर एक कारोबारी लॉबी से जुड़े लेन-देन में सामने आया था. उन्हें पहले प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए बुलाया था और बाद में सीबीआई ने भी जांच की. विपक्षी दलों ने इसे केंद्र सरकार द्वारा एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश बताया, जबकि भाजपा ने जांच को कानून के दायरे में बताया था.
अदालत के फैसले पर क्या है कानून के जानकारों की राय
अदालत के ताजा फैसले ने इस बहुचर्चित मामले को बड़ा मोड़ दे दिया है. कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया है, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग न्यायिक प्रक्रिया की अहमियत सामने आती है. अब निगाहें इस पर रहेंगी कि क्या जांच एजेंसियां इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देती हैं या नहीं. फिलहाल, बरी हुए नेताओं के लिए यह राहत की बड़ी खबर है और राष्ट्रीय राजनीति में इसके असर पर चर्चा तेज हो गई है.