Holi 2026: धर्मनगरी में संतों ने खेली रंग और गोबर से पंचकव्य होली, दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश


Holi 2026: फाल्गुन रंगों, उल्लास, उमंग और मस्ती का महीना है. देशभर में कहीं बरसाना की लठमार होली तो कहीं मथुरा की फूलों वाली होली की धूम है. हर तरफ रंग और उमंग का उत्सव देखने को मिल रहा है. वहीं धर्मनगरी हरिद्वार के जूना अखाड़ा में संतों ने अनोखे अंदाज में रंगों और गाय के गोबर से होली खेलकर परंपरा और आस्था का संदेश दिया.

शुक्रवार 27 फरवरी 2026 को हरिद्वार के जूना खाड़ी स्थित माया देवी मंदिर प्रांगण में निरंजनी अखाड़ा और जूना अखाड़ा के संतों ने पारंपरिक रंगों के साथ-साथ गाय के गोबर से होली खेली. संतों ने एक-दूसरे को रंग और गोबर लगाकर शुभकामनाएं दीं तथा भजन-कीर्तन के बीच उत्सव मनाया.

इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि- गोबर होली हमारी सनातन परंपरा का प्रतीक है. गाय को हिंदू धर्म में माता का दर्जा दिया गया है और उसका गोबर भी पवित्र माना जाता है. यह प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति की विशिष्टता का संदेश देता है.

वहीं स्वामी हरिगिरि महाराज, महामंत्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, हरिद्वार ने कहा कि होली का पर्व संत समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है. गोबर होली के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया जा रहा है कि हमें अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना चाहिए तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना चाहिए. संत समाज ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे होली को प्रेम, सौहार्द और मर्यादा के साथ मनाएं.

इसके साथ ही संत समाज ने देशवासियों से भी अपील की है कि, वे होली को प्रेम, सौहार्द और मर्यादा के साथ मनाएं, जिससे यह पर्व केवल रंगों का नहीं बल्कि संस्कारों और सद्भाव का भी उत्सव बने.

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