US-Israel Attack Iran: ‘अमेरिका भारत-चीन की तरक्की को रोकना…’, मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच ईरान का बड़ा खुलासा, जानें क्या कहा?
US और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर वैश्विक संघर्षों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि अमेरिका अपनी ताकत बनाए रखने के लिए दुनिया में अस्थिरता पैदा करता है. भारत में ईरान के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ जारी संघर्ष का एक मकसद भारत और चीन जैसी उभरती ताकतों को आगे बढ़ने से रोकना भी है.
अमेरिका किसी देश को बराबरी में नहीं आने देगा: इलाही
अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि आने वाले समय में भारत, चीन, रूस और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियां होंगी, लेकिन अमेरिका नहीं चाहता कि कोई और देश उसके बराबर ताकतवर बने. उनके मुताबिक, इसी वजह से अमेरिका ऐसे युद्धों को बढ़ावा देता है ताकि वह अपनी वैश्विक पकड़ बनाए रख सके.
इलाही ने यह भी कहा कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका और इजरायल ने की है, न कि ईरान ने. उन्होंने कहा कि ईरान अपने बचाव में कार्रवाई कर रहा है. उनका कहना था कि अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमले कर रहे हैं और नागरिक इलाकों पर बमबारी कर रहे हैं, जबकि ईरान सिर्फ अपनी रक्षा कर रहा है.
#WATCH | US-Israel vs Iran conflict | “The aim of America is not Iran, but after Iran, it will come to other countries. According to investigations, in the near future, there will be a shift of power to some other countries. In the near future, the most powerful countries in the… pic.twitter.com/gcEKUCxQpR
— ANI (@ANI) March 3, 2026
ईरान के खिलाफ झूठी खबरें फैलाई जा रही है
अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि अगर अमेरिका युद्ध रोक दे तो ईरान भी अपनी कार्रवाई रोक देगा. ईरानी प्रतिनिधि ने यह भी दावा किया कि ईरान इस समय दो तरह के युद्ध लड़ रहा है. पहला सैन्य युद्ध है, जो अमेरिका और इजरायल के खिलाफ है. दूसरा नैरेटिव वॉर यानी सूचना और प्रचार का युद्ध है. उनका आरोप है कि इस दूसरे युद्ध में ईरान के खिलाफ झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं.
इलाही ने कहा कि यह दावा किया जा रहा है कि ईरान की जनता शासन परिवर्तन चाहती है, जबकि उनके अनुसार यह सही नहीं है. इलाही का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ रही है.